शनिवार, 12 मार्च 2011

कुछ महत्वपूरण तथ्य

महा माया देवी श्री बाला सुन्दरी के  बारे मैं मंदिर के पंडितो के कथनानुसार देवबंद मैं जहा यह मंदिर है वहां पर माता सति का गुप्तांग गिरा था जिस कारण सति को भगवती कहा जाने लगा .पूजारियो के  कथनानुसार माता के  इस रूप के  दर्शन करने वाला व्यक्ति अँधा हो जाता है .इसलिए पुजारी गण नित्य प्रति जब माँ को स्नान करते है तो मंदिर का दरवाजा बंद कर देते है और कमरे मैं अँधेरा कर के आँखों पर पट्टी बांध लेते है .गर्भग्रह   के  मुख्या द्वार के  माथे पर एक प्राचीन शिलालेख लगा है .इस पर अज्ञात भाषा मैं कुछ लिखा है जिसे आज तक कोई पढ़ नहीं पाया है .मानना है की इस शिलालेख की भाषा पढ़े जाने पर इसके काल की जानकारी प्राप्त हो सकती है .महाभारत और मार्कंडेय पुराण मैं उपलब्ध विवरण के  अनुसार महाभारत काल मैं महाभारत के  युद्ध के  समय पांडवो ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ देवीवन ,देवबंद मैं
`बिताया था .और इसी प्रकार देवीवन मैं स्थित इसी मंदिर मैं दनुर्धारी अर्जुन ने शक्ति की साधना  की थी.पुरानो मैं यह भी उलेख है की उस काल मैं माँ बाला सुन्दरी का यह स्थान गंगा के समीप था .माँ बाला सुन्दरी के इस शक्ति पीठ पर माँ काली और शाकुम्भरी के मंदिर भी है . अकाल के समय भूख से त्राहि त्राहि कर रहे जीवो की रक्षा के लिए माँ ने अपना शरीर शकमय बना लिया था जिस कारण प्रथ्वी  पर जीवो को जीवनदान मिला था .तभी से माँ अन्न्पूर्न्ना माँ शाक्मय  औए शाकुम्भरी के नाम से विख्यात हुई थी .देवबंद से ८५ किलोमीटर दूर शिवालिक  मैं माँ शाकुम्भरी देवी का मंदिर है .और  माँ शाकुम्भरी तथा माँ बाला सुन्दरी दोनों बहने है .मान्यता के  अनुसार शाकुम्भरी जाने वाले भक्तो के लिय पहले यहाँ दर्शन करना अनिवार्य होता है .तभी उनकी यात्रा पूरी मानी जाती है
                  देवबंद बालासुन्दरी मंदिर पर प्रत्येक वर्ष चेत्र सुदी शुकल पक्स मैं चोदस को एक विशाल मेला लगता है इस मेले मैं दूकानदार दूर -दूर से पहले पहुचकर अपनी अपनी दुकाने सजा लेते है और देश के  कोने कोने से लोग यहाँ दर्शनार्थ पहुचते है क्योकि माना जाता है की माँ अपने भक्तो की मनोकामना पूरी करने के लिए ९ दिन तक मंदिर मैं आती है .और माँ के  आने और जाने का भक्त इस तरह पता लगाते है की उनके आने और जाने पर कर्मश:काफी तेज आंधी और तूफ़ान तथा बारिश भी होती है .

4 टिप्‍पणियां:

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  4. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
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    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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